मेरे घर की खिड़की

“लेखक:एम बी बलवंत सिंह खन्ना” बचपन की स्मृतियाँ कभी-कभी यूँ लौट आती हैं जैसे हवा का कोई झोंका अचानक मन को छू जाए। मुझे आज भी याद है, जब होश संभाला था, तब गाँव की हर सुबह किसी उत्सव से कम नहीं होती थी। चारों ओर हरियाली, खेतों में लहलहाती फसलें, खुले मैदान पर खेलते…

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हॉस्टल डायरी- ‘अधूरे एहसासों से पूरी हुई कहानी’

लेखक- एम बी बलवंत सिंह खन्ना छोटे से कस्बे की साक्षी जब पहली बार शहर आई, तो उसके मन में उत्साह और डर दोनों थे। गाँव की गलियों से निकलकर विश्वविद्यालय के बड़े दरवाज़े तक पहुँचना उसके लिए किसी सपने से कम नहीं था। परिवार ने उसे हमेशा संस्कार और सादगी का पाठ पढ़ाया था,…

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गरबा की रात और अधूरी दुआ

लेखक एम बी बलवंत सिंह खन्ना शरद नवरात्रि का मौसम था। पूरे शहर में उत्सव का आलोक बिखरा हुआ था। पंडालों में देवी दुर्गा की प्रतिमाएं विराजमान थीं, तो कहीं कॉलोनियों और मैदानों में गरबा की धुन गूंज रही थी। गाँव से निकला कुमार अब शहर में पढ़ाई कर रहा था। बचपन में वह माँ…

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“तू जा, मैं संभाल लूँगा”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना क्या एक पति का अपनी पत्नी से यह कहना-“तू जा, मैं संभाल लूँगा”- सिर्फ़ एक भावनात्मक वाक्य है? या यह एक नई सामाजिक क्रांति की दस्तक है? यह सवाल हमें उस दौर में ले जाता है जहाँ सदियों से पुरुषों को परिवार का “कमाने वाला” और स्त्रियों को “घर…

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“गाँव छोड़ शहर क्यों? क्या अपने सपनों को जन्मभूमि में ही साकार कर सकते हैं?”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना आज भारत के गाँवों से युवाओं का शहरों की ओर पलायन एक आम दृश्य बन गया है। गाँव की मिट्टी से उठकर कोई बच्चा जब कड़ी मेहनत से पढ़ाई करता है तो उसका सपना होता है कि वह अपने परिवार का जीवन बदल दे। लेकिन सच यह है कि…

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माँ की गोद से बड़ा कोई सुकून नहीं

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना गाँव की कच्ची गलियों से जब भी सूरज की सुनहरी किरणें छनकर आतीं, तो लगता जैसे हर ईंट, हर पेड़ और हर छप्पर में जीवन साँस ले रहा हो। यही गाँव था जहाँ कुमार का जन्म हुआ था। मिट्टी की खुशबू, बैलों की घंटियाँ, कुएँ पर खनकते घड़ों की…

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अवैध संबंधों का जाल : किशोर, युवा और समाज पर असर

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना आज का दौर तेज़ी से बदल रहा है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और बदलती जीवनशैली ने इंसान को जितना जोड़ा है, उतना ही अकेला भी किया है। दोस्त बनाने की आज़ादी है, रिश्ते निभाने के विकल्प खुले हैं, और पल भर में नए संबंध बन जाते हैं। लेकिन इसी के…

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“हमारे बीच के निषादराज”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना रामायण में निषादराज की कहानी हम सबने कभी-न-कभी पढ़ी, सुनी या देखी होगी। जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान गंगा तट पहुँचे, तब गंगा पार कराने के लिए निषादराज ने अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। यह प्रसंग केवल नदी पार करने का नहीं है, बल्कि…

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“कपड़े सस्ते थे, सपने नहीं”

रायपुर में जन्मा आत्मविश्वास, जो अब कभी कम नहीं होता रायपुर मेरे लिए केवल एक शहर नहीं रहा।यह मेरे व्यक्तित्व का निर्माण स्थल है, मेरी आत्मा का रंग, और मेरे सपनों का पहला ठिकाना। छोटे कस्बे से निकलकर जब मैं इस शहर की धड़कन में शामिल हुआ, तब न तो जेब भारी थी और न…

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“धुएं में उड़ता बचपन – वर्तमान समय की नई चुनौती”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना बचपन जो सादगी और मासूमियत के लिए जाना जाता है, आज एक नई सामाजिक बीमारी से जूझ रहा है। बचपन जहां लोग अपनी सहजता और अपनत्व से किसी को भी “अपना” बना लेते हैं, अब उसी समाज में एक गंभीर समस्या चुपचाप जड़ें जमा रही है – कम उम्र…

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