लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना
आज का दौर तेज़ी से बदल रहा है। इंटरनेट, सोशल मीडिया और बदलती जीवनशैली ने इंसान को जितना जोड़ा है, उतना ही अकेला भी किया है। दोस्त बनाने की आज़ादी है, रिश्ते निभाने के विकल्प खुले हैं, और पल भर में नए संबंध बन जाते हैं। लेकिन इसी के बीच एक बड़ी समस्या भी तेजी से बढ़ रही है— किशोरावस्था और युवावस्था में असमय शारीरिक संबंध, शादी से पहले या बाद में कई रिश्ते निभाने की प्रवृत्ति और अवैध संबंधों का जाल।
यह विषय केवल व्यक्तिगत नहीं है, बल्कि परिवार और पूरे समाज को प्रभावित करता है। किशोर और युवा अगर इसे सही समय पर समझ लें, तो जीवन की बड़ी समस्याओं और पछतावों से बच सकते हैं।

- किशोरावस्था और आकर्षण की भूलभुलैया
किशोरावस्था जीवन का वह पड़ाव है जब भावनाएँ और जिज्ञासा सबसे ज्यादा होती हैं। शरीर में हो रहे बदलाव और मन में उठते सवाल अक्सर युवाओं को जल्दी संबंध बनाने की ओर खींचते हैं।
- “सबको गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड है, मुझे क्यों नहीं?”
- “अगर किसी से प्यार नहीं किया तो मैं पिछड़ जाऊँगा।”
- “मुझे आज़ादी है, मैं जैसा चाहूँ कर सकता हूँ।”
ऐसे विचार आम हैं। लेकिन यही जिज्ञासा जब गलत दिशा पकड़ लेती है, तब युवा असमय शारीरिक संबंध बनाने लगते हैं। शुरुआती रोमांच अच्छा लगता है, लेकिन धीरे-धीरे ये रिश्ते मानसिक दबाव और पछतावे का कारण बन जाते हैं।
- शादी से पहले कई रिश्ते – आधुनिकता या धोखा?
आज कई युवाओं को लगता है कि शादी से पहले कई रिश्तों को आज़माना ज़रूरी है।
कुछ सोचते हैं, “रिश्ते निभाकर देखो, जो सबसे अच्छा लगे वही स्थायी होगा।”
लेकिन असल में होता उल्टा है।
- कई रिश्तों में रहने वाला व्यक्ति भावनात्मक रूप से स्थिर नहीं रह पाता।
- किसी एक पर विश्वास टिकाना मुश्किल हो जाता है।
- बार-बार दिल टूटने से निराशा और अवसाद बढ़ता है।
- और सबसे बड़ा नुकसान यह है कि शादी के बाद भी भरोसे की कमी बनी रहती है।
यानी एक गलत आदत ज़िंदगी भर साथ चल सकती है।
- शादी के बाद अवैध संबंध – परिवार पर गहरा घाव
शादी का रिश्ता सिर्फ दो लोगों का नहीं होता, बल्कि दो परिवारों का होता है। यह विश्वास, निष्ठा और जिम्मेदारी पर टिका होता है। लेकिन जब पति या पत्नी में से कोई अवैध संबंध बनाता है, तो वह विश्वास टूट जाता है।
इसके दुष्परिणाम बहुत गहरे होते हैं— - घर में झगड़े और तनाव बढ़ जाते हैं।
- बच्चे मानसिक रूप से असुरक्षित और अकेले महसूस करते हैं।
- कई बार यह तलाक, घरेलू हिंसा या अपराध तक ले जाता है।
- समाज में बदनामी होती है और रिश्तेदारों से दूरी बढ़ जाती है।
यानी क्षणिक आकर्षण पूरे परिवार का जीवन बर्बाद कर देता है। - मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर असर
अवैध या असमय संबंध केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि शारीरिक नुकसान भी पहुंचाते हैं।
- किशोरावस्था में असुरक्षित यौन संबंध से बीमारियों का खतरा बढ़ता है।
- असमय गर्भधारण, खासकर किशोरियों के लिए, जीवन की सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।
- अपराधबोध, डर और छुपाने की मजबूरी से मानसिक तनाव बढ़ता है।
- पढ़ाई और करियर पर ध्यान भटक जाता है।
यानी आकर्षण के चक्कर में सेहत और भविष्य दोनों दांव पर लग जाते हैं।
- सोशल मीडिया और वर्चुअल रिलेशनशिप का खतरा
आजकल फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सऐप और डेटिंग ऐप्स ने युवाओं को और ज्यादा खुला मंच दिया है। दोस्ती करना आसान है, लेकिन कई बार यह झूठ और धोखे पर आधारित होता है।
- प्रोफाइल नकली हो सकती है।
- कोई सिर्फ शारीरिक संबंध के लिए पास आ सकता है।
- चैट और वीडियो कॉल से निकटता जल्दी बढ़ती है, लेकिन असल में यह बहुत सतही रिश्ता होता है।
सोशल मीडिया के इन रिश्तों से कई युवा शोषण, ब्लैकमेल और अपराध का शिकार भी हो जाते हैं।
- समाज और संस्कृति पर असर
जब रिश्तों में ईमानदारी और निष्ठा खत्म होती है, तो उसका असर पूरे समाज पर पड़ता है।
- परिवार टूटने लगते हैं।
- बच्चों में बगावत और आक्रोश बढ़ता है।
- सामाजिक विश्वास और मूल्य कमजोर होते हैं।
- रिश्तों की पवित्रता का महत्व घटता है।
छत्तीसगढ़ जैसे सांस्कृतिक और पारिवारिक मूल्यों से भरे समाज में यह प्रवृत्ति और भी खतरनाक है, क्योंकि यहाँ परिवार ही सामाजिक ढांचे की रीढ़ है।
- समाधान और जागरूकता
अवैध संबंधों और असमय रिश्तों से बचने के लिए कुछ जरूरी बातें— - स्वयं पर नियंत्रण– भावनाओं को समझें, लेकिन उनके बहाव में न बहें।
- परिवार से संवाद – माता-पिता से खुलकर बात करें, ताकि गलत रास्तों पर न जाएँ।
- सही मित्र मंडली चुनें – दोस्ती वही रखें जो सकारात्मक सोच रखते हों।
- सोशल मीडिया पर सावधानी – किसी अनजान पर आंख मूंदकर विश्वास न करें।
- शिक्षा और करियर पर ध्यान– असली पहचान पढ़ाई और काम से बनती है, रिश्तों के दिखावे से नहीं।
- विवाह का सम्मान करें – शादी के बाद निष्ठा ही सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
- युवाओं के लिए संदेश
किशोर और युवाओं को यह समझना होगा कि—
रिश्ते निभाना एक जिम्मेदारी है, खेल नहीं।
अगर आप मजबूत और सच्चे रिश्ते बनाएंगे तो न केवल आपका जीवन खुशहाल होगा, बल्कि आपका परिवार और समाज भी सुरक्षित रहेगा।
अवैध संबंध और असमय शारीरिक रिश्ते शुरुआत में रोमांचक लग सकते हैं, लेकिन अंत में ये केवल दुख, पछतावा और टूटे हुए रिश्ते ही छोड़ते हैं। परिवार और समाज की मजबूती रिश्तों की पवित्रता और निष्ठा में है। युवाओं और किशोरों को चाहिए कि वे सही रास्ता चुनें, अपने रिश्तों का सम्मान करें और अपने भविष्य को सुरक्षित बनाएं।
याद रखिए—क्षणिक आकर्षण भुला देने योग्य है, लेकिन रिश्तों की सच्चाई जीवनभर साथ रहती है।असली प्यार वही है जो सम्मान, विश्वास और स्थिरता दे।क्षणिक आकर्षण के लिए अपने भविष्य को खतरे में डालना मूर्खता है।
