चेहरा नहीं, भरोसा याद रहता है

डिजिटल युग के अनकहे रिश्तों पर एक चिंतन लेखक: एम. बी. बलवंत सिंह खन्ना मनुष्य के जीवन में कुछ रिश्ते जन्म से मिलते हैं, कुछ समय के साथ बनते हैं और कुछ ऐसे भी होते हैं जिनका न कोई नाम होता है, न कोई परिचय और न ही कभी आमने-सामने मुलाकात। फिर भी वे हमारे…

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आज़ादी बनाम असुरक्षा: सवाल लड़कियों की स्वतंत्रता पर नहीं, समाज की मानसिकता पर है

लेखक: एम. बी. बलवंत सिंह खन्ना भारत जैसे सामाजिक ढांचे वाले देश में किसी लड़की का घर की चौखट पार कर अपने दम पर खड़ा होना आज भी आसान नहीं है। आज भी लाखों लड़कियाँ ऐसी हैं जिन्हें पढ़ाई, नौकरी, करियर या अपने निर्णय लेने की आज़ादी बड़ी मुश्किल से मिलती है। कई घरों में…

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“सफ़र के उस पार”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना ©️ गर्मी अपने पूरे तेवर में थी। हवा भी जैसे तपकर चल रही थी। ऐसे मौसम में लोग जहाँ घरों में दुबकना पसंद करते हैं, वहीं अनन्या ने एक बार फिर सफ़र चुन लिया-गर्म प्रदेश से दूर, पहाड़ों की ठंडी वादियों की ओर। अनन्या-नाम ही उसके स्वभाव का परिचय…

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“हुक्का-पानी से व्हाट्सऐप तक -समाज से दूरी की बदलती कहानी”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना कल्पना कीजिए…अगर आपको अपने ही गाँव से, अपने ही समाज से बेदखल कर दिया जाए।लोग आपसे बात करना बंद कर दें, आपके घर का हुक्का–पानी बंद कर दिया जाए, कोई लेन-देन न रखे, न सुख-दुख में कोई साथ खड़ा हो-तो आप क्या करेंगे? यह केवल एक सामाजिक दंड नहीं…

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हार और जीत के बीच का भाव

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना मैदान के एक कोने में शोर था।तालियों की गूंज, मुस्कुराते चेहरे, कंधों पर उठाए जा रहे खिलाड़ी, और हवा में उड़ती खुशियाँ।लग रहा था जैसे उस पल समय भी ठहर कर उस जीत को देखना चाहता हो। और उसी मैदान के दूसरे कोने में…एक अजीब सा सन्नाटा था। वह…

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“चुप्पी का शोर”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना हम जिस दुनिया में जी रहे हैं, वह पहले कभी इतनी भरी हुई नहीं थी।हाथों में मोबाइल, कानों में ईयरफोन, आँखों में स्क्रीन और मन में अनगिनत सूचनाएँ।हर पल कुछ न कुछ चल रहा है-मैसेज, कॉल, नोटिफिकेशन, खबरें, रीलें, मीम्स। लेकिन इसी शोर के बीच एक चीज़ सबसे ज़्यादा…

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वर्दी, वैलेंटाइन और विवेक

(प्यार, पद और प्रलोभन के बीच फँसी एक पीढ़ी के नाम) लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना वैलेंटाइन सप्ताह-7 फ़रवरी से 14 फ़रवरी तक-आज के समय में सिर्फ़ प्रेम का उत्सव नहीं रहा। यह सप्ताह अब सोशल मीडिया, रील्स, गिफ्ट्स, सरप्राइज़ और ग्लैमर के बीच प्यार के प्रदर्शन का मंच बन चुका है। युवा दिल…

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“अगर भटकी पत्नी हो…!!”

(मातृ शक्ति से मानव शक्ति तक की यात्रा) लेखक: एम. बी. बलवंत सिंह खन्ना पिछले सप्ताह जब मेरी कहानी “ओ री पत्नी” प्रकाशित हुई, तो अनेक पाठकों ने सराहना की। सबने माना कि एक स्त्री, एक पत्नी, किस तरह अपने प्रेम, धैर्य और मौन से टूटते रिश्ते को सँभाल लेती है।पर उसी प्रशंसा के बीच…

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ओ री पत्नी

लेखक : एम बी बलवंत सिंह खन्ना ©️ प्रेम नाम जैसा ही था-मुलायम, आकर्षक और चंचल। निजी क्षेत्र की भागती-दौड़ती दुनिया में वह अपनी जगह बना चुका था। चालीस की उम्र ने उसके चेहरे पर अनुभव की रेखाएँ खींच दी थीं, पर आँखों की चमक अब भी वैसी ही थी, जैसी युवावस्था में होती है।…

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संबंध, सवाल, सम्मान और रुचि

(नव वर्ष की पहली सोच, पहली संवेदना)लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना नव वर्ष केवल कैलेंडर की तारीख बदलने का नाम नहीं होता, यह अपने भीतर झाँकने, अपने संबंधों को टटोलने और जीवन के रास्तों को नए अर्थ देने का अवसर भी होता है। ऐसे समय में जब दुनिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है,…

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