तुमने मुझे सुना था

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना©️ रात के साढ़े ग्यारह बजे थे। शहर की ज्यादातर खिड़कियों में रोशनी बुझ चुकी थी, लेकिन निखिल के कमरे की खिड़की अब भी खुली थी। सामने सड़क पर आती-जाती गाड़ियों की रोशनी कमरे की दीवार पर कुछ पल के लिए चमकती और फिर अंधेरा पहले से थोड़ा गहरा हो…

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कॉकरोच से क्रांति तक: क्या इतिहास स्वयं को दोहरा रहा है?

अन्ना आंदोलन 2011 बनाम कॉकरोच जनता पार्टी आंदोलन 2026 का तुलनात्मक विश्लेषण लेखक: एम. बी. बलवंत सिंह खन्ना भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में कुछ आंदोलन ऐसे होते हैं जो केवल सरकार के खिलाफ विरोध नहीं होते, बल्कि व्यवस्था और जनता के बीच बढ़ती दूरी का प्रतीक बन जाते हैं। वर्ष 2011 का अन्ना हज़ारे आंदोलन…

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“त्याग सिर्फ जनता करे, तो सत्ता किसलिए?”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना भारत एक लोकतांत्रिक और कल्याणकारी राष्ट्र है। यहाँ सरकार केवल शासन करने के लिए नहीं चुनी जाती, बल्कि संकट के समय जनता की ढाल बनने के लिए चुनी जाती है। लेकिन हर बड़े संकट, हर आर्थिक दबाव और हर राष्ट्रीय चुनौती के समय एक सवाल बार-बार सिर उठाता हैक्या…

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हार और जीत के बीच का भाव

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना मैदान के एक कोने में शोर था।तालियों की गूंज, मुस्कुराते चेहरे, कंधों पर उठाए जा रहे खिलाड़ी, और हवा में उड़ती खुशियाँ।लग रहा था जैसे उस पल समय भी ठहर कर उस जीत को देखना चाहता हो। और उसी मैदान के दूसरे कोने में…एक अजीब सा सन्नाटा था। वह…

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“चुप्पी का शोर”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना हम जिस दुनिया में जी रहे हैं, वह पहले कभी इतनी भरी हुई नहीं थी।हाथों में मोबाइल, कानों में ईयरफोन, आँखों में स्क्रीन और मन में अनगिनत सूचनाएँ।हर पल कुछ न कुछ चल रहा है-मैसेज, कॉल, नोटिफिकेशन, खबरें, रीलें, मीम्स। लेकिन इसी शोर के बीच एक चीज़ सबसे ज़्यादा…

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नालायक

(विद्या निकेतन मॉडल कॉन्वेंट स्कूल, पामगढ़ – रजत जयंती समारोह 2026 के स्मरण में) लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना ©️ रजत जयंती…पच्चीस वर्षों की साधना, संघर्ष और संस्कार का उत्सव। जब मुझे यह समाचार मिला कि विद्या निकेतन मॉडल कॉन्वेंट स्कूल, पामगढ़ अपना रजत जयंती समारोह मना रहा है, तो मन के भीतर कोई…

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संबंध, सवाल, सम्मान और रुचि

(नव वर्ष की पहली सोच, पहली संवेदना)लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना नव वर्ष केवल कैलेंडर की तारीख बदलने का नाम नहीं होता, यह अपने भीतर झाँकने, अपने संबंधों को टटोलने और जीवन के रास्तों को नए अर्थ देने का अवसर भी होता है। ऐसे समय में जब दुनिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है,…

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‘कतार’

“कतार- व्यवस्था, विवशता और हमारी सोच का आईना” लेखक : एम बी बलवंत सिंह खन्ना कतार- एक साधारण सा शब्द, लेकिन हमारे सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक जीवन का सबसे बड़ा प्रतीक। कतार कभी व्यवस्था का संकेत देती है, तो कभी अव्यवस्था का प्रमाण बन जाती है। कहीं यह अनुशासन सिखाती है, तो कहीं यह हमारी…

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भारत की बेटी का अभ्युदय: संघर्ष से शिखर तक

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना आज भारतीय इतिहास की नई प्रभात है। वह क्षण, जब करोड़ों हृदयों ने गर्व की धड़कन महसूस की। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने पहली बार अंतरराष्ट्रीय विश्व कप जीतकर यह प्रमाणित कर दिया — सपनों का कोई लिंग नहीं होता, केवल समर्पण और साहस होता है।यह विजय केवल खेल…

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“छत्तीसगढ़िया वाद: सादगी को कमजोरी मत समझिए”

लेखक: एम बलवंत सिंह खन्ना सादर नमन उस धरती को, जिसने सत्य, संतुलन और संवाद को हमेशा जीवन का मूल माना- छत्तीसगढ़।यह वही भूमि है जहाँ संत बाबा गुरु घासीदास जी ने जन्म लेकर मनखे-मनखे एक समान का संदेश दिया; जहाँ शहीद वीर नारायण सिंह ने अत्याचार के विरुद्ध आवाज़ उठाई; जहाँ डॉक्टर खुबचंद बघेल…

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