तुमने मुझे सुना था
लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना©️ रात के साढ़े ग्यारह बजे थे। शहर की ज्यादातर खिड़कियों में रोशनी बुझ चुकी थी, लेकिन निखिल के कमरे की खिड़की अब भी खुली थी। सामने सड़क पर आती-जाती गाड़ियों की रोशनी कमरे की दीवार पर कुछ पल के लिए चमकती और फिर अंधेरा पहले से थोड़ा गहरा हो…
