चेहरा नहीं, भरोसा याद रहता है

डिजिटल युग के अनकहे रिश्तों पर एक चिंतन लेखक: एम. बी. बलवंत सिंह खन्ना मनुष्य के जीवन में कुछ रिश्ते जन्म से मिलते हैं, कुछ समय के साथ बनते हैं और कुछ ऐसे भी होते हैं जिनका न कोई नाम होता है, न कोई परिचय और न ही कभी आमने-सामने मुलाकात। फिर भी वे हमारे…

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“हुक्का-पानी से व्हाट्सऐप तक -समाज से दूरी की बदलती कहानी”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना कल्पना कीजिए…अगर आपको अपने ही गाँव से, अपने ही समाज से बेदखल कर दिया जाए।लोग आपसे बात करना बंद कर दें, आपके घर का हुक्का–पानी बंद कर दिया जाए, कोई लेन-देन न रखे, न सुख-दुख में कोई साथ खड़ा हो-तो आप क्या करेंगे? यह केवल एक सामाजिक दंड नहीं…

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हार और जीत के बीच का भाव

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना मैदान के एक कोने में शोर था।तालियों की गूंज, मुस्कुराते चेहरे, कंधों पर उठाए जा रहे खिलाड़ी, और हवा में उड़ती खुशियाँ।लग रहा था जैसे उस पल समय भी ठहर कर उस जीत को देखना चाहता हो। और उसी मैदान के दूसरे कोने में…एक अजीब सा सन्नाटा था। वह…

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“चुप्पी का शोर”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना हम जिस दुनिया में जी रहे हैं, वह पहले कभी इतनी भरी हुई नहीं थी।हाथों में मोबाइल, कानों में ईयरफोन, आँखों में स्क्रीन और मन में अनगिनत सूचनाएँ।हर पल कुछ न कुछ चल रहा है-मैसेज, कॉल, नोटिफिकेशन, खबरें, रीलें, मीम्स। लेकिन इसी शोर के बीच एक चीज़ सबसे ज़्यादा…

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“अगर भटकी पत्नी हो…!!”

(मातृ शक्ति से मानव शक्ति तक की यात्रा) लेखक: एम. बी. बलवंत सिंह खन्ना पिछले सप्ताह जब मेरी कहानी “ओ री पत्नी” प्रकाशित हुई, तो अनेक पाठकों ने सराहना की। सबने माना कि एक स्त्री, एक पत्नी, किस तरह अपने प्रेम, धैर्य और मौन से टूटते रिश्ते को सँभाल लेती है।पर उसी प्रशंसा के बीच…

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नालायक

(विद्या निकेतन मॉडल कॉन्वेंट स्कूल, पामगढ़ – रजत जयंती समारोह 2026 के स्मरण में) लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना ©️ रजत जयंती…पच्चीस वर्षों की साधना, संघर्ष और संस्कार का उत्सव। जब मुझे यह समाचार मिला कि विद्या निकेतन मॉडल कॉन्वेंट स्कूल, पामगढ़ अपना रजत जयंती समारोह मना रहा है, तो मन के भीतर कोई…

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ओ री पत्नी

लेखक : एम बी बलवंत सिंह खन्ना ©️ प्रेम नाम जैसा ही था-मुलायम, आकर्षक और चंचल। निजी क्षेत्र की भागती-दौड़ती दुनिया में वह अपनी जगह बना चुका था। चालीस की उम्र ने उसके चेहरे पर अनुभव की रेखाएँ खींच दी थीं, पर आँखों की चमक अब भी वैसी ही थी, जैसी युवावस्था में होती है।…

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संबंध, सवाल, सम्मान और रुचि

(नव वर्ष की पहली सोच, पहली संवेदना)लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना नव वर्ष केवल कैलेंडर की तारीख बदलने का नाम नहीं होता, यह अपने भीतर झाँकने, अपने संबंधों को टटोलने और जीवन के रास्तों को नए अर्थ देने का अवसर भी होता है। ऐसे समय में जब दुनिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है,…

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मिट्टी बुला रही थी…

लेखक- एम बी बलवंत सिंह खन्ना सुबह का सूरज अभी ठीक से निकला भी नहीं था।हल्की सुनहरी रोशनी गाँव के पुराने पीपल के नीचे फैल रही थी। वहीं खड़ा था बिरजू-एक साधारण किसान, जिसकी हथेलियाँ सूखी थीं, पर उनमें अब भी मिट्टी की गर्माहट बाकी थी। वह अपने खेतों को देख रहा था। वही ज़मीन,…

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“बेडरूम”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना विवाह, मर्यादा और बेडरूम की शांत दुनिया की एक कहानी विवाह सिर्फ़ दो लोगों का साथ नहीं—दो संसारों का मिलन है।दो संस्कृतियाँ, दो आदतें, दो परिवार, दो तरीके… सब धीरे-धीरे एक ही धुन में ढलते हैं।और इस धुन को सुर में रखने की सबसे नाज़ुक, सबसे महत्वपूर्ण जगह है—बेडरूम।…

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