प्रेम की अधूरी पराकाष्ठा

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना “प्रेम की अधूरी पराकाष्ठा”:“वह प्रेम जो अपनी गहराई, पवित्रता और निस्वार्थता में सर्वोच्च था — पर फिर भी अधूरा रह गया।” साल 2014 की जुलाई थी। मौसम बरसात का था और मन भीगने को तैयार। यूनिवर्सिटी का तीसरा साल चल रहा था। लाइब्रेरी की खिड़की के पास बैठा मैं,…

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प्रेम की दिशा: कुमार और सान्वी की कहानी

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना कहते हैं, हर सफल पुरुष के पीछे किसी स्त्री का हाथ होता है — यह बात बचपन से सुनते आए थे। लेकिन समय ने कई बार यह भी दिखाया कि कुछ पुरुषों का साथ, कुछ स्त्रियों के जीवन की दिशा ही बदल देता है। यह कहानी ऐसी ही एक…

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शब्दों का संस्कार: जब भाषा से मर्यादा हटने लगे

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना भारत, एक ऐसा देश जो अपनी सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों के लिए विश्वविख्यात रहा है। यहाँ की मिट्टी से लेकर यहाँ की बोली तक में एक खास तरह की आत्मीयता, विनम्रता और मर्यादा झलकती थी। हम बचपन से सुनते आए हैं — वाणी में मधुरता होनी चाहिए, क्योंकि शब्दों…

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झिझक — एक अदृश्य बोझ

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना यह लेख उन सभी के लिए है जो खुद को ‘मिडिल क्लास’ और उससे नीचे मानते हैं — क्योंकि ऊपर वाले इस वर्ग की झिझक नाम की चीज़ से मुलाक़ात ही नहीं होती। कल्पना कीजिए — आप एक नए शहर में हैं, या अपने ही कस्बे के एक नए…

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अनदेखी चेहरे की वो दोस्ती(एक अंतहीन प्रेम का आलोक)

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना बात 2009 की है, जब मोबाइल फोन शहरों की सीमा लांघकर कस्बों और गाँवों में दस्तक देने लगे थे। उस वक्त हर हाथ में फोन नहीं होता था, और कॉल भी काफी महंगे हुआ करते थे। रिलायंस का छोटा सा सीडीएमए फोन, उसमें सीमित बैलेंस, और हर कॉल से…

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“खून का यह रंग शर्म नहीं, समझ की ज़रूरत है”

आता तो हर महीने है… कुछ दिन साथ भी रहता है… लेकिन कोई उससे बात नहीं करता। कोई उसके बारे में बात नहीं करना चाहता।वो चुपचाप आता है… दर्द, असहजता, और डर साथ लाता है…कभी स्कूल की छुट्टी बनकर, तो कभी आत्म-संकोच का कारण बनकर।उसका नाम लेना भी ‘शर्म’ समझा जाता है, जैसे कोई अपराध…

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“जहाँ नामों में गांव बसता है”

गांव के पूरब कोने में, जहाँ अब भी महुआ के पेड़ हर वसंत अपनी चुप खुशबू बिखेरते हैं, वहीं मिट्टी की दीवारों से घिरा एक पुराना सा घर खड़ा है। छप्पर कुछ झुक चुका है, दीवारों पर समय की दरारें उभर आई हैं, मगर आंगन अब भी वैसा ही साफ और पवित्र लगता है, जैसा…

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“क्लिक से रिश्ता, दस्तख़त से जुदाई”

(एक कहानी, जो हज़ारों के आईने में खुद को देखती है) रुचि कभी ज़्यादा बोलने वाली नहीं थी। लेकिन उसकी चुप्पी में वो सब था, जो शब्द कभी कह नहीं पाते। माँ के मस्तिष्क में उभरते हुए सफ़ेद बाल और पिताजी की झुकी हुई पीठ के बीच, उसने अपने सपनों को तह करके अलमारी के…

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“भोलेनाथ का आशीर्वाद: प्रेम और विश्वास की अनंत शक्ति”

छोटे से गांव में एक साधारण और निश्चल व्यक्ति रहता था जिसका नाम रामू था। रामू का जीवन कठिनाइयों से भरा था। बचपन में ही उसने अपने माता-पिता को खो दिया था और उसका पालन-पोषण उसकी बूढ़ी दादी ने किया। वह बचपन से ही सरल, निर्दोष और दूसरों की मदद करने में हमेशा आगे रहता…

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