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“बेडरूम”
लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना विवाह, मर्यादा और बेडरूम की शांत दुनिया की एक कहानी विवाह सिर्फ़ दो लोगों का साथ नहीं—दो संसारों का मिलन है।दो संस्कृतियाँ, दो आदतें, दो परिवार, दो तरीके… सब धीरे-धीरे एक ही धुन में ढलते हैं।और इस धुन को सुर में रखने की सबसे नाज़ुक, सबसे महत्वपूर्ण जगह है—बेडरूम।…
“जल–जंगल–जमीन और छत्तीसगढ़ : पहचान, संघर्ष और शांति का नया सवाल”
लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना छत्तीसगढ़ की मिट्टी हमेशा से शांत रही है -घने वनों, पहाड़ों और जनजातीय संस्कृति की सहजता से भरी हुई। पर हाल के दिनों में राजधानी दिल्ली से लेकर बस्तर तक जिस तरह “जल–जंगल–जमीन” के नाम पर बहसें तेज़ हुई हैं, उसने फिर एक बार इस प्रदेश के मूल प्रश्नों…
“छत्तीसगढ़िया वाद: सादगी को कमजोरी मत समझिए”
लेखक: एम बलवंत सिंह खन्ना सादर नमन उस धरती को, जिसने सत्य, संतुलन और संवाद को हमेशा जीवन का मूल माना- छत्तीसगढ़।यह वही भूमि है जहाँ संत बाबा गुरु घासीदास जी ने जन्म लेकर मनखे-मनखे एक समान का संदेश दिया; जहाँ शहीद वीर नारायण सिंह ने अत्याचार के विरुद्ध आवाज़ उठाई; जहाँ डॉक्टर खुबचंद बघेल…
माँ की गोद से बड़ा कोई सुकून नहीं
लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना गाँव की कच्ची गलियों से जब भी सूरज की सुनहरी किरणें छनकर आतीं, तो लगता जैसे हर ईंट, हर पेड़ और हर छप्पर में जीवन साँस ले रहा हो। यही गाँव था जहाँ कुमार का जन्म हुआ था। मिट्टी की खुशबू, बैलों की घंटियाँ, कुएँ पर खनकते घड़ों की…
“हमारे बीच के निषादराज”
लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना रामायण में निषादराज की कहानी हम सबने कभी-न-कभी पढ़ी, सुनी या देखी होगी। जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान गंगा तट पहुँचे, तब गंगा पार कराने के लिए निषादराज ने अपना सर्वस्व समर्पित कर दिया। यह प्रसंग केवल नदी पार करने का नहीं है, बल्कि…
“कपड़े सस्ते थे, सपने नहीं”
रायपुर में जन्मा आत्मविश्वास, जो अब कभी कम नहीं होता रायपुर मेरे लिए केवल एक शहर नहीं रहा।यह मेरे व्यक्तित्व का निर्माण स्थल है, मेरी आत्मा का रंग, और मेरे सपनों का पहला ठिकाना। छोटे कस्बे से निकलकर जब मैं इस शहर की धड़कन में शामिल हुआ, तब न तो जेब भारी थी और न…
“मेहंदी के रंग में रचा प्रेम”
(A Love Story Rooted in a Moment, Grown by Destiny) लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना “एक प्रेम कहानी — जो एक क्षण में अंकुरित हुई और किस्मत ने उसे सींचा।”वो दिन आज भी मेरे ज़ेहन में वैसे ही महकता है, जैसे कोई भीगी मिट्टी पर पहली बारिश की खुशबू से। मैं 28 वर्ष का…
“गुज़र जाना चाहिए”
(एक ऐसे प्रेम की कहानी, जिसे कोई नाम नहीं चाहिए) लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना वो किसी रेलगाड़ी की खिड़की से बाहर देखते हुए अचानक बोला था —“हम मिलते तो हैं, लेकिन शायद ज़रूरत से ज़्यादा देर के लिए…” और मैं हँस दी थी, जैसे कोई गंभीर बात को हल्का करना चाहती हो।हम दोनों…
प्रेम की अधूरी पराकाष्ठा
लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना “प्रेम की अधूरी पराकाष्ठा”:“वह प्रेम जो अपनी गहराई, पवित्रता और निस्वार्थता में सर्वोच्च था — पर फिर भी अधूरा रह गया।” साल 2014 की जुलाई थी। मौसम बरसात का था और मन भीगने को तैयार। यूनिवर्सिटी का तीसरा साल चल रहा था। लाइब्रेरी की खिड़की के पास बैठा मैं,…
