प्रेम की दिशा: कुमार और सान्वी की कहानी

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना कहते हैं, हर सफल पुरुष के पीछे किसी स्त्री का हाथ होता है — यह बात बचपन से सुनते आए थे। लेकिन समय ने कई बार यह भी दिखाया कि कुछ पुरुषों का साथ, कुछ स्त्रियों के जीवन की दिशा ही बदल देता है। यह कहानी ऐसी ही एक…

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झिझक — एक अदृश्य बोझ

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना यह लेख उन सभी के लिए है जो खुद को ‘मिडिल क्लास’ और उससे नीचे मानते हैं — क्योंकि ऊपर वाले इस वर्ग की झिझक नाम की चीज़ से मुलाक़ात ही नहीं होती। कल्पना कीजिए — आप एक नए शहर में हैं, या अपने ही कस्बे के एक नए…

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अनदेखी चेहरे की वो दोस्ती(एक अंतहीन प्रेम का आलोक)

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना बात 2009 की है, जब मोबाइल फोन शहरों की सीमा लांघकर कस्बों और गाँवों में दस्तक देने लगे थे। उस वक्त हर हाथ में फोन नहीं होता था, और कॉल भी काफी महंगे हुआ करते थे। रिलायंस का छोटा सा सीडीएमए फोन, उसमें सीमित बैलेंस, और हर कॉल से…

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क्लिक से रिश्ता, दस्तख़त से जुदाई

रुचि कभी ज़्यादा बोलने वाली नहीं थी। लेकिन उसकी चुप्पी में वो सब था, जो शब्द कभी कह नहीं पाते। माँ के मस्तिष्क में उभरते हुए सफ़ेद बाल और पिताजी की झुकी हुई पीठ के बीच, उसने अपने सपनों को तह करके अलमारी के किसी कोने में रख दिया। हर दिन घर के आँगन में…

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परिवर्तन की राह

शहर से सटे एक गाँव में जमींदार बनवारी का परिवार रहता था। उनके पूर्वजों से विरासत में मिली ज़मीनें कभी परिवार की शान और रुतबे का प्रतीक थीं। बनवारी ने अपने जीवन में कभी कोई कमी महसूस नहीं की, क्योंकि ज़मीन की उपज और मवेशियों से परिवार का गुजारा आराम से चलता था। लेकिन बनवारी…

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“ईमानदारी की पाठशाला”

वर्ष 2005 का समय था। जांजगीर जिले में शिक्षा का माहौल कुछ और ही था, एक ऐसा माहौल जिसे अब सोचकर भी अजीब लगता है। नकल का इतना जोर था कि परीक्षा देने वाला हर विद्यार्थी असमंजस में होता कि वह मेहनत करे या नकल के भरोसे बैठे। परीक्षा केंद्रों पर नकल करवाने वालों की…

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शहीद चंद्रशेखर: एक वीर योद्धा की अनसुनी कहानी

“कर्तव्य की अंतिम पंक्ति” चंद्रशेखर कुर्रे का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी तहसील के छोटे से गांव जलसो में हुआ था। साधारण परिवार में पले-बढ़े चंद्रशेखर का जीवन हमेशा संघर्षों से भरा रहा। पिता एक किसान थे, जो मेहनत करके परिवार का पेट पालते थे। चंद्रशेखर का बचपन बहुत कठिनाइयों में बीता। आर्थिक…

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“शब्दों की धरोहर: एक लेखक की यात्रा नवभारत से डिजिटल युग तक”

“शब्दों की धरोहर: एक लेखक की यात्रा नवभारत से डिजिटल युग तक” करीब बीस साल पहले की बात है, जब हर सुबह हमारे घर में नवभारत अखबार का आना एक पारिवारिक रिवाज था। अखबार के पन्नों में खबरें तो होतीं, लेकिन मेरे लिए सबसे प्रिय हिस्सा था—शब्दावली वाला पृष्ठ। जैसे ही अखबार मेरे हाथ में…

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अनसुनी चेतावनी…!!!

“जो आवाज़ हम नहीं सुनते, वो कभी-कभी काफ़ी देर बाद सुनाई देती है…”“प्रकृति को नजरअंदाज करने की कीमत हमेशा चुकानी पड़ती है।” दोपहर का वक्त था, ऑफिस में काम के बीच घिरा हुआ था। लंच का समय हो चुका था, लेकिन काम की व्यस्तता इतनी थी कि खाने का ख्याल भी नहीं आया। तभी मोबाइल…

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“आवश्यकता है-“सपनों की राह”

आकाश, एक साधारण सा युवक था, जो गाँव की मिट्टी से बेतरह जुड़ा हुआ था। उसके सपने बड़े थे, और उन्हें पूरा करने का दृढ़ निश्चय भी। गाँव के स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद, उसने अपने पिता की सलाह पर कस्बे के कॉलेज में दाखिला लिया। कॉलेज की पढ़ाई खत्म होते ही, आकाश…

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