हुंकारू: कहानियों की धड़कन

80-90 के दशक की वो सुनहरी शामें, जब गांव की मिट्टी में खेलने के बाद बच्चों के पैर धूल से सने होते थे और घर के आंगन में चौपाल लगती थी। चूल्हे से उठता धुंआं, और दादा-दादी, नाना-नानी के होठों से बहती कहानियों का जादू। दिनभर के काम के बाद, थके हुए शरीर और तरोताज़ा…

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हम अब भी कपड़ों से इंसान पहचानते हैं…

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना सुबह की भागदौड़ भरी उस घड़ी में मैंने शायद ये नहीं सोचा था कि आज का दिन मुझे एक ऐसा अनुभव देगा, जो समाज की सोच पर सवाल उठा देगा।रायपुर की सेजबहार स्थित मेरी कॉलोनी गोल्फ ग्रीन में बीती रात आए आंधी-तूफान ने बिजली व्यवस्था ठप कर दी। हमारी…

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“जहाँ नामों में गांव बसता है”

गांव के पूरब कोने में, जहाँ अब भी महुआ के पेड़ हर वसंत अपनी चुप खुशबू बिखेरते हैं, वहीं मिट्टी की दीवारों से घिरा एक पुराना सा घर खड़ा है। छप्पर कुछ झुक चुका है, दीवारों पर समय की दरारें उभर आई हैं, मगर आंगन अब भी वैसा ही साफ और पवित्र लगता है, जैसा…

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“गड्ढे से ज्ञान तक”

छत्तीसगढ़ के छोटे से गाँव की मिट्टी में गहराई तक बसे संघर्षों की एक कहानी है, जहाँ जीवन की बुनियाद केवल मेहनत और मजदूरी पर टिकी थी। इस गाँव में जन्मा रामलाल, जो एक साधारण किसान परिवार से था, उसकी जिंदगी का उद्देश्य भी वही था जो उसके पिता और दादा का था—खेती और मजदूरी।…

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परिवर्तन की राह

शहर से सटे एक गाँव में जमींदार बनवारी का परिवार रहता था। उनके पूर्वजों से विरासत में मिली ज़मीनें कभी परिवार की शान और रुतबे का प्रतीक थीं। बनवारी ने अपने जीवन में कभी कोई कमी महसूस नहीं की, क्योंकि ज़मीन की उपज और मवेशियों से परिवार का गुजारा आराम से चलता था। लेकिन बनवारी…

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“ईमानदारी की पाठशाला”

वर्ष 2005 का समय था। जांजगीर जिले में शिक्षा का माहौल कुछ और ही था, एक ऐसा माहौल जिसे अब सोचकर भी अजीब लगता है। नकल का इतना जोर था कि परीक्षा देने वाला हर विद्यार्थी असमंजस में होता कि वह मेहनत करे या नकल के भरोसे बैठे। परीक्षा केंद्रों पर नकल करवाने वालों की…

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“गाँव की नई सुबह,पंचायती राज से सशक्त होता छत्तीसगढ़”

छत्तीसगढ़ के छोटे से गाँव रसौटा में चुनावी माहौल गर्म था। गाँव की गलियों में रोज़ चर्चाएँ होतीं, जनसभाएँ होतीं, और प्रत्याशी अपने-अपने समर्थकों के साथ घर-घर जाकर समर्थन मांग रहे थे। हर किसी के चेहरे पर उम्मीद और उत्साह झलक रहा था। पंचायत चुनाव नज़दीक थे, और गाँव के लोग बड़ी दिलचस्पी के साथ…

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