“शिक्षा का बदलता चेहरा-अधिकार, अवसर या आर्थिक विभाजन?”

लेखक- एम बी बलवंत सिंह खन्ना ©️ पिछले दो सोमवारों की व्यस्तता के बाद जब कलम फिर से हाथ में आई, तो मन सीधे उस विषय की ओर गया जो हर घर, हर परिवार और हर भविष्य से जुड़ा है-शिक्षा।अप्रैल का महीना है। स्कूलों में नए दाखिले शुरू हो चुके हैं। हर माता-पिता अपने बच्चे…

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“टैक्स के बदले तसल्ली?-या अधिकारों का व्यवस्थित क्षरण”

लेखक : एम बी बलवंत सिंह खन्ना दुनिया एक अस्थिर दौर से गुजर रही है। कहीं युद्ध हैं, कहीं आर्थिक अनिश्चितता, कहीं संसाधनों पर संघर्ष। इन वैश्विक हलचलों का असर सीमाओं के भीतर भी महसूस किया जा रहा है-महँगाई बढ़ती है, आपूर्ति प्रभावित होती है, और आम आदमी की ज़िंदगी पर दबाव बढ़ता है।लेकिन सवाल…

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“हुक्का-पानी से व्हाट्सऐप तक -समाज से दूरी की बदलती कहानी”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना कल्पना कीजिए…अगर आपको अपने ही गाँव से, अपने ही समाज से बेदखल कर दिया जाए।लोग आपसे बात करना बंद कर दें, आपके घर का हुक्का–पानी बंद कर दिया जाए, कोई लेन-देन न रखे, न सुख-दुख में कोई साथ खड़ा हो-तो आप क्या करेंगे? यह केवल एक सामाजिक दंड नहीं…

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हार और जीत के बीच का भाव

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना मैदान के एक कोने में शोर था।तालियों की गूंज, मुस्कुराते चेहरे, कंधों पर उठाए जा रहे खिलाड़ी, और हवा में उड़ती खुशियाँ।लग रहा था जैसे उस पल समय भी ठहर कर उस जीत को देखना चाहता हो। और उसी मैदान के दूसरे कोने में…एक अजीब सा सन्नाटा था। वह…

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“चुप्पी का शोर”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना हम जिस दुनिया में जी रहे हैं, वह पहले कभी इतनी भरी हुई नहीं थी।हाथों में मोबाइल, कानों में ईयरफोन, आँखों में स्क्रीन और मन में अनगिनत सूचनाएँ।हर पल कुछ न कुछ चल रहा है-मैसेज, कॉल, नोटिफिकेशन, खबरें, रीलें, मीम्स। लेकिन इसी शोर के बीच एक चीज़ सबसे ज़्यादा…

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वर्दी, वैलेंटाइन और विवेक

(प्यार, पद और प्रलोभन के बीच फँसी एक पीढ़ी के नाम) लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना वैलेंटाइन सप्ताह-7 फ़रवरी से 14 फ़रवरी तक-आज के समय में सिर्फ़ प्रेम का उत्सव नहीं रहा। यह सप्ताह अब सोशल मीडिया, रील्स, गिफ्ट्स, सरप्राइज़ और ग्लैमर के बीच प्यार के प्रदर्शन का मंच बन चुका है। युवा दिल…

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नालायक

(विद्या निकेतन मॉडल कॉन्वेंट स्कूल, पामगढ़ – रजत जयंती समारोह 2026 के स्मरण में) लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना ©️ रजत जयंती…पच्चीस वर्षों की साधना, संघर्ष और संस्कार का उत्सव। जब मुझे यह समाचार मिला कि विद्या निकेतन मॉडल कॉन्वेंट स्कूल, पामगढ़ अपना रजत जयंती समारोह मना रहा है, तो मन के भीतर कोई…

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ओ री पत्नी

लेखक : एम बी बलवंत सिंह खन्ना ©️ प्रेम नाम जैसा ही था-मुलायम, आकर्षक और चंचल। निजी क्षेत्र की भागती-दौड़ती दुनिया में वह अपनी जगह बना चुका था। चालीस की उम्र ने उसके चेहरे पर अनुभव की रेखाएँ खींच दी थीं, पर आँखों की चमक अब भी वैसी ही थी, जैसी युवावस्था में होती है।…

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संबंध, सवाल, सम्मान और रुचि

(नव वर्ष की पहली सोच, पहली संवेदना)लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना नव वर्ष केवल कैलेंडर की तारीख बदलने का नाम नहीं होता, यह अपने भीतर झाँकने, अपने संबंधों को टटोलने और जीवन के रास्तों को नए अर्थ देने का अवसर भी होता है। ऐसे समय में जब दुनिया तेज़ी से आगे बढ़ रही है,…

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‘कतार’

“कतार- व्यवस्था, विवशता और हमारी सोच का आईना” लेखक : एम बी बलवंत सिंह खन्ना कतार- एक साधारण सा शब्द, लेकिन हमारे सामाजिक, आर्थिक और प्रशासनिक जीवन का सबसे बड़ा प्रतीक। कतार कभी व्यवस्था का संकेत देती है, तो कभी अव्यवस्था का प्रमाण बन जाती है। कहीं यह अनुशासन सिखाती है, तो कहीं यह हमारी…

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