MB Balwant Singh Khanna

एम बी बलवंत सिंह खन्ना जन्म 18 जुलाई 1989 जन्म स्थान- ग्राम हिर्री पोस्ट ससहा थाना पामगढ़ जिला जांजगीर चाँपा छत्तीसगढ़। वर्तमान निवास- गोल्फ ग्रीन कॉलोनी पुरानी धमतरी रोड रायपुर छत्तीसगढ़ शिक्षा- बी ए (गुरु घासीदास एवं बिलासपुर विश्वविद्यालय बिलासपुर) , एम एस डब्ल्यू(कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय काठडीह रायपुर) वर्तमान कार्य क्षेत्र- संचालक आखर पी आर कम्युनिकेशन प्राइवेट लिमिटेड रायपुर छत्तीसगढ़।

जब आदि ने अकेले भरी दाखिला की राह: एक शिक्षाप्रद और भावनात्मक अनुभव

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना एक छोटे से कस्बे में जन्मा आदि, एक ऐसा लड़का था जो पढ़ाई में ठीक-ठाक था। परिवार में पढ़ाई का माहौल था, सभी लोग शिक्षित थे, लेकिन बड़े शहरों जैसी जानकारी और संसाधन नहीं थे। आदि के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ उस समय आया जब उसने 12वीं कक्षा…

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प्रेम की अधूरी पराकाष्ठा

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना “प्रेम की अधूरी पराकाष्ठा”:“वह प्रेम जो अपनी गहराई, पवित्रता और निस्वार्थता में सर्वोच्च था — पर फिर भी अधूरा रह गया।” साल 2014 की जुलाई थी। मौसम बरसात का था और मन भीगने को तैयार। यूनिवर्सिटी का तीसरा साल चल रहा था। लाइब्रेरी की खिड़की के पास बैठा मैं,…

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प्रेम की दिशा: कुमार और सान्वी की कहानी

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना कहते हैं, हर सफल पुरुष के पीछे किसी स्त्री का हाथ होता है — यह बात बचपन से सुनते आए थे। लेकिन समय ने कई बार यह भी दिखाया कि कुछ पुरुषों का साथ, कुछ स्त्रियों के जीवन की दिशा ही बदल देता है। यह कहानी ऐसी ही एक…

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आधुनिक जीवन शैली में कमजोर पड़ते पारिवारिक नाते-रिश्ते: एक सांस्कृतिक यात्रा पाषाण युग से 21वीं सदी तक

लेखक- एम बी बलवंत सिंह खन्ना मानव सभ्यता की यात्रा एक बहुत लंबी और गहन प्रक्रिया रही है। पाषाण युग से लेकर आज की 21वीं सदी तक, इंसान ने जीवन के हर क्षेत्र में विकास किया है—रहन-सहन, तकनीक, शिक्षा, चिकित्सा, संचार, और सबसे अधिक सामाजिक संरचना में। परंतु इस प्रगति के बीच एक बात जो…

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शब्दों का संस्कार: जब भाषा से मर्यादा हटने लगे

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना भारत, एक ऐसा देश जो अपनी सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों के लिए विश्वविख्यात रहा है। यहाँ की मिट्टी से लेकर यहाँ की बोली तक में एक खास तरह की आत्मीयता, विनम्रता और मर्यादा झलकती थी। हम बचपन से सुनते आए हैं — वाणी में मधुरता होनी चाहिए, क्योंकि शब्दों…

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ग़रीब का आशियाना: विकास बनाम विस्थापन की दास्तान

जब मानव ने पृथ्वी पर जीवन शुरू किया, उसकी बुनियादी ज़रूरतें थीं—भोजन, वस्त्र और आश्रय। पाषाण युग में गुफाएं उसकी छत थीं, पत्ते और जानवरों की खालें वस्त्र। फिर समय के साथ मानव ने खेती, निर्माण और बुनाई सीखी, समाज बना, नगर बसे, शासन और कानून विकसित हुए। शिक्षा, चिकित्सा, और कारोबार जैसे क्षेत्र आगे…

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झिझक — एक अदृश्य बोझ

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना यह लेख उन सभी के लिए है जो खुद को ‘मिडिल क्लास’ और उससे नीचे मानते हैं — क्योंकि ऊपर वाले इस वर्ग की झिझक नाम की चीज़ से मुलाक़ात ही नहीं होती। कल्पना कीजिए — आप एक नए शहर में हैं, या अपने ही कस्बे के एक नए…

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मेरे आँगन का पर्यावरण

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना आज विश्व पर्यावरण दिवस है। मन बार-बार कुछ लिखने को कह रहा है — लेकिन शब्द कहाँ से शुरू करूँ, ये समझ नहीं आता। शायद इसलिए कि मैं जिस ग्रामीण पृष्ठभूमि से आता हूँ, वहाँ जीवन और पर्यावरण दो अलग चीज़ें नहीं, बल्कि एक ही साँस के दो रूप…

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उदन्त मार्तंड: उस पहले दीपक की कहानी जिसने हिंदी पत्रकारिता की राह रोशन की

लेखक- दिव्यांशु कश्यप जब हम आज सुबह की चाय के साथ अख़बार खोलते हैं या सोशल मीडिया पर हिंदी में कोई खबर पढ़ते हैं, तो शायद ही सोचते हैं कि इस अभिव्यक्ति की आज़ादी की शुरुआत कब और कैसे हुई होगी। पर कभी-कभी इतिहास की धूल में छुपे उन पहले क़दमों को याद करना ज़रूरी…

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अनदेखी चेहरे की वो दोस्ती(एक अंतहीन प्रेम का आलोक)

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना बात 2009 की है, जब मोबाइल फोन शहरों की सीमा लांघकर कस्बों और गाँवों में दस्तक देने लगे थे। उस वक्त हर हाथ में फोन नहीं होता था, और कॉल भी काफी महंगे हुआ करते थे। रिलायंस का छोटा सा सीडीएमए फोन, उसमें सीमित बैलेंस, और हर कॉल से…

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