“हुक्का-पानी से व्हाट्सऐप तक -समाज से दूरी की बदलती कहानी”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना कल्पना कीजिए…अगर आपको अपने ही गाँव से, अपने ही समाज से बेदखल कर दिया जाए।लोग आपसे बात करना बंद कर दें, आपके घर का हुक्का–पानी बंद कर दिया जाए, कोई लेन-देन न रखे, न सुख-दुख में कोई साथ खड़ा हो-तो आप क्या करेंगे? यह केवल एक सामाजिक दंड नहीं…

Read More

हार और जीत के बीच का भाव

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना मैदान के एक कोने में शोर था।तालियों की गूंज, मुस्कुराते चेहरे, कंधों पर उठाए जा रहे खिलाड़ी, और हवा में उड़ती खुशियाँ।लग रहा था जैसे उस पल समय भी ठहर कर उस जीत को देखना चाहता हो। और उसी मैदान के दूसरे कोने में…एक अजीब सा सन्नाटा था। वह…

Read More

“जोड़े” -विवाह, परंपरा और नई पीढ़ी के बीच फँसा हुआ निर्णय

लेखक : एम बी बलवंत सिंह खन्ना छत्तीसगढ़ में विवाह केवल एक सामाजिक अनुबंध नहीं, बल्कि उत्सव है। विशेषकर गर्मियों के दिन-जब स्कूलों की परीक्षाएँ समाप्त हो जाती हैं, छुट्टियाँ लग जाती हैं और गाँव-शहर में रिश्तेदारों का आना-जाना आसान हो जाता है-तब शादियों का मौसम अपने चरम पर होता है। ढोल-नगाड़े, मंगलगीत, हल्दी-मेहंदी, बारात…

Read More

“सिफ़ारिश का समाज: जहाँ योग्यता से पहले पहचान चलती है”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना ©️ हम एक ऐसे समय में जी रहे हैं जहाँ आदमी की पहचान उसके नाम से कम और उसके रेफरेंस से ज़्यादा पूछी जाती है।आज सबसे पहले सवाल यह नहीं होता कि आप क्या जानते हैं, क्या कर सकते हैं, कितने योग्य हैंबल्कि यह होता है कि“आप किसकी सिफ़ारिश…

Read More

“चुप्पी का शोर”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना हम जिस दुनिया में जी रहे हैं, वह पहले कभी इतनी भरी हुई नहीं थी।हाथों में मोबाइल, कानों में ईयरफोन, आँखों में स्क्रीन और मन में अनगिनत सूचनाएँ।हर पल कुछ न कुछ चल रहा है-मैसेज, कॉल, नोटिफिकेशन, खबरें, रीलें, मीम्स। लेकिन इसी शोर के बीच एक चीज़ सबसे ज़्यादा…

Read More

वर्दी, वैलेंटाइन और विवेक

(प्यार, पद और प्रलोभन के बीच फँसी एक पीढ़ी के नाम) लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना वैलेंटाइन सप्ताह-7 फ़रवरी से 14 फ़रवरी तक-आज के समय में सिर्फ़ प्रेम का उत्सव नहीं रहा। यह सप्ताह अब सोशल मीडिया, रील्स, गिफ्ट्स, सरप्राइज़ और ग्लैमर के बीच प्यार के प्रदर्शन का मंच बन चुका है। युवा दिल…

Read More

“अगर भटकी पत्नी हो…!!”

(मातृ शक्ति से मानव शक्ति तक की यात्रा) लेखक: एम. बी. बलवंत सिंह खन्ना पिछले सप्ताह जब मेरी कहानी “ओ री पत्नी” प्रकाशित हुई, तो अनेक पाठकों ने सराहना की। सबने माना कि एक स्त्री, एक पत्नी, किस तरह अपने प्रेम, धैर्य और मौन से टूटते रिश्ते को सँभाल लेती है।पर उसी प्रशंसा के बीच…

Read More

नालायक

(विद्या निकेतन मॉडल कॉन्वेंट स्कूल, पामगढ़ – रजत जयंती समारोह 2026 के स्मरण में) लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना ©️ रजत जयंती…पच्चीस वर्षों की साधना, संघर्ष और संस्कार का उत्सव। जब मुझे यह समाचार मिला कि विद्या निकेतन मॉडल कॉन्वेंट स्कूल, पामगढ़ अपना रजत जयंती समारोह मना रहा है, तो मन के भीतर कोई…

Read More

ओ री पत्नी

लेखक : एम बी बलवंत सिंह खन्ना ©️ प्रेम नाम जैसा ही था-मुलायम, आकर्षक और चंचल। निजी क्षेत्र की भागती-दौड़ती दुनिया में वह अपनी जगह बना चुका था। चालीस की उम्र ने उसके चेहरे पर अनुभव की रेखाएँ खींच दी थीं, पर आँखों की चमक अब भी वैसी ही थी, जैसी युवावस्था में होती है।…

Read More

कुंडी से कैमरे तक

(गांव से शहर तक की एक यात्रा कथा) लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना बबलू जब भी अपने घर की बालकनी में खड़ा होकर कॉलोनी के मुख्य गेट की ओर देखता, तो उसे अपने गांव का वह कच्चा दरवाज़ा याद आ जाता, जिसकी कुंडी कभी पूरी तरह बंद ही नहीं होती थी।आज यहां ऊँची दीवारें…

Read More
Back To Top