“गाँव की नई सुबह,पंचायती राज से सशक्त होता छत्तीसगढ़”

छत्तीसगढ़ के छोटे से गाँव रसौटा में चुनावी माहौल गर्म था। गाँव की गलियों में रोज़ चर्चाएँ होतीं, जनसभाएँ होतीं, और प्रत्याशी अपने-अपने समर्थकों के साथ घर-घर जाकर समर्थन मांग रहे थे। हर किसी के चेहरे पर उम्मीद और उत्साह झलक रहा था। पंचायत चुनाव नज़दीक थे, और गाँव के लोग बड़ी दिलचस्पी के साथ…

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अनसुनी चेतावनी…!!!

“जो आवाज़ हम नहीं सुनते, वो कभी-कभी काफ़ी देर बाद सुनाई देती है…”“प्रकृति को नजरअंदाज करने की कीमत हमेशा चुकानी पड़ती है।” दोपहर का वक्त था, ऑफिस में काम के बीच घिरा हुआ था। लंच का समय हो चुका था, लेकिन काम की व्यस्तता इतनी थी कि खाने का ख्याल भी नहीं आया। तभी मोबाइल…

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खंडहर होती यादें

विगत दिनों पिता जी का 86 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया। आज गाँव में उनकी तेरहवीं पूरी विधि-विधान से सम्पन्न की गई। पिता जी की आखिरी साँसें शहर के हमारे घर पर निकलीं, लेकिन उनका मन हमेशा गाँव में ही बसा था। उम्र के आखिरी पड़ाव पर, मजबूरी में हमें उन्हें शहर लाना…

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“आवश्यकता है-“सपनों की राह”

आकाश, एक साधारण सा युवक था, जो गाँव की मिट्टी से बेतरह जुड़ा हुआ था। उसके सपने बड़े थे, और उन्हें पूरा करने का दृढ़ निश्चय भी। गाँव के स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद, उसने अपने पिता की सलाह पर कस्बे के कॉलेज में दाखिला लिया। कॉलेज की पढ़ाई खत्म होते ही, आकाश…

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“गाँव के तिरंगे तले: बचपन के गणतंत्र दिवस की मिठास”

करीब 25 साल पहले की बात है, जब मैं सिर्फ़ एक बच्चा था, अपनी ज़िंदगी के सबसे मासूम और सुनहरे दिनों को जी रहा था। गाँव के छोटे से सरकारी स्कूल में, जहाँ हमने पढ़ाई की शुरुआत की, वहाँ की हर याद आज भी दिल में बसी हुई है। और खासकर गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता…

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“शांति निवास: एकता की विरासत”

सर्दियों की ठिठुरती शाम थी। गाँव के एक कोने में एक पुराना सा, मिट्टी की दीवारों और खपरैल की छत वाला बड़ा घर था। इस घर में वर्षों से एक संयुक्त परिवार निवास करता था। चार पीढ़ियों का एक साथ होना उस घर की खासियत थी। बड़े-बुज़ुर्गों से लेकर छोटे बच्चों तक, सब एक ही…

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साधराम की यादों का कोठार

छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले के पामगढ़ तहसील के गाँव हिर्री की मिट्टी में एक पुराना और साधारण परिवार बसा हुआ था, जो पिछले कई पीढ़ियों से इस गाँव में निवासरत हैं। इस परिवार की कहानी साधराम से शुरू होती है, जो 70 वर्ष का किसान था। उसका जीवन सादगी और अनुभव का अनूठा उदाहरण था।…

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“आँगन की साँसें: एक खोई विरासत का पुनर्जागरण”

वर्षों पहले गाँव के एक कोने में बसा एक छोटा सा घर था। घर के बीचों-बीच एक आँगन था, जहाँ तुलसी का चौरा हर सुबह धूप और जल से पूजित होता था। आँगन में सुबह की किरणें जब गिरतीं, तो पूरे घर में एक अद्भुत ऊर्जा का संचार होता। बच्चे वहीं खेलते, बूढ़े दादा-दादी अपनी…

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वर्तमान हाइब्रिड युग

आयुर्वेद, कृषि, लेखन शैली और डिजिटल परिवर्तन हम जिस युग में जी रहे हैं, उसे हम “हाइब्रिड युग” के रूप में देख सकते हैं। यह युग उन परिवर्तनों का समय है जब परंपरागत तरीके और आधुनिक तकनीकी विधियाँ एक साथ कार्य कर रही हैं, और इसका प्रभाव हमारे जीवन के हर क्षेत्र में देखने को…

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