अफ़ेयर – मन की अधूरी भूख या रिश्तों की अनकही पुकार?

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना अफ़ेयर — यह शब्द जितना आकर्षक लगता है, उतना ही समाज में विवादों से घिरा हुआ भी है।कई लोग इसे पाप कहते हैं, कुछ गलती मानते हैं, और कुछ इसे प्रेम का एक और रूप।पर सच यह है कि यह विषय न केवल मानवीय भावनाओं की गहराई से जुड़ा…

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“वो दीवाली, जब बिना स्टेटस लगाए भी त्योहार मनते थे”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना रात के आठ बजे थे, मोहल्ले में झिलमिल करती लाइटों की कतारें टिमटिमा रही थीं, लेकिन दिल में कहीं एक खालीपन था। खिड़की से बाहर देखा- बच्चे मोबाइल में व्यस्त थे, कोई वीडियो बना रहा था, कोई नए पटाखों का शो दिखा रहा था। चमक ज़रूर थी, पर न…

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मेरे घर की खिड़की

“लेखक:एम बी बलवंत सिंह खन्ना” बचपन की स्मृतियाँ कभी-कभी यूँ लौट आती हैं जैसे हवा का कोई झोंका अचानक मन को छू जाए। मुझे आज भी याद है, जब होश संभाला था, तब गाँव की हर सुबह किसी उत्सव से कम नहीं होती थी। चारों ओर हरियाली, खेतों में लहलहाती फसलें, खुले मैदान पर खेलते…

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हॉस्टल डायरी- ‘अधूरे एहसासों से पूरी हुई कहानी’

लेखक- एम बी बलवंत सिंह खन्ना छोटे से कस्बे की साक्षी जब पहली बार शहर आई, तो उसके मन में उत्साह और डर दोनों थे। गाँव की गलियों से निकलकर विश्वविद्यालय के बड़े दरवाज़े तक पहुँचना उसके लिए किसी सपने से कम नहीं था। परिवार ने उसे हमेशा संस्कार और सादगी का पाठ पढ़ाया था,…

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गरबा की रात और अधूरी दुआ

लेखक एम बी बलवंत सिंह खन्ना शरद नवरात्रि का मौसम था। पूरे शहर में उत्सव का आलोक बिखरा हुआ था। पंडालों में देवी दुर्गा की प्रतिमाएं विराजमान थीं, तो कहीं कॉलोनियों और मैदानों में गरबा की धुन गूंज रही थी। गाँव से निकला कुमार अब शहर में पढ़ाई कर रहा था। बचपन में वह माँ…

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“तू जा, मैं संभाल लूँगा”

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना क्या एक पति का अपनी पत्नी से यह कहना-“तू जा, मैं संभाल लूँगा”- सिर्फ़ एक भावनात्मक वाक्य है? या यह एक नई सामाजिक क्रांति की दस्तक है? यह सवाल हमें उस दौर में ले जाता है जहाँ सदियों से पुरुषों को परिवार का “कमाने वाला” और स्त्रियों को “घर…

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सुंदरम

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना रिश्तों की दुनिया बड़ी अजीब होती है। कुछ रिश्ते खून से बनते हैं, कुछ समाज से, और कुछ अनजाने ही दिल की गहराइयों में पनप जाते हैं। ये वही रिश्ते होते हैं जिनके नाम नहीं होते, पर उनकी मौजूदगी हर पल महसूस होती है। राघव और अवनि का रिश्ता…

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माँ की गोद से बड़ा कोई सुकून नहीं

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना गाँव की कच्ची गलियों से जब भी सूरज की सुनहरी किरणें छनकर आतीं, तो लगता जैसे हर ईंट, हर पेड़ और हर छप्पर में जीवन साँस ले रहा हो। यही गाँव था जहाँ कुमार का जन्म हुआ था। मिट्टी की खुशबू, बैलों की घंटियाँ, कुएँ पर खनकते घड़ों की…

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प्रेम की दिशा: कुमार और सान्वी की कहानी

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना कहते हैं, हर सफल पुरुष के पीछे किसी स्त्री का हाथ होता है — यह बात बचपन से सुनते आए थे। लेकिन समय ने कई बार यह भी दिखाया कि कुछ पुरुषों का साथ, कुछ स्त्रियों के जीवन की दिशा ही बदल देता है। यह कहानी ऐसी ही एक…

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अनदेखी चेहरे की वो दोस्ती(एक अंतहीन प्रेम का आलोक)

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना बात 2009 की है, जब मोबाइल फोन शहरों की सीमा लांघकर कस्बों और गाँवों में दस्तक देने लगे थे। उस वक्त हर हाथ में फोन नहीं होता था, और कॉल भी काफी महंगे हुआ करते थे। रिलायंस का छोटा सा सीडीएमए फोन, उसमें सीमित बैलेंस, और हर कॉल से…

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