“गड्ढे से ज्ञान तक”

छत्तीसगढ़ के छोटे से गाँव की मिट्टी में गहराई तक बसे संघर्षों की एक कहानी है, जहाँ जीवन की बुनियाद केवल मेहनत और मजदूरी पर टिकी थी। इस गाँव में जन्मा रामलाल, जो एक साधारण किसान परिवार से था, उसकी जिंदगी का उद्देश्य भी वही था जो उसके पिता और दादा का था—खेती और मजदूरी।…

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परिवर्तन की राह

शहर से सटे एक गाँव में जमींदार बनवारी का परिवार रहता था। उनके पूर्वजों से विरासत में मिली ज़मीनें कभी परिवार की शान और रुतबे का प्रतीक थीं। बनवारी ने अपने जीवन में कभी कोई कमी महसूस नहीं की, क्योंकि ज़मीन की उपज और मवेशियों से परिवार का गुजारा आराम से चलता था। लेकिन बनवारी…

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“ईमानदारी की पाठशाला”

वर्ष 2005 का समय था। जांजगीर जिले में शिक्षा का माहौल कुछ और ही था, एक ऐसा माहौल जिसे अब सोचकर भी अजीब लगता है। नकल का इतना जोर था कि परीक्षा देने वाला हर विद्यार्थी असमंजस में होता कि वह मेहनत करे या नकल के भरोसे बैठे। परीक्षा केंद्रों पर नकल करवाने वालों की…

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“भटकी पीढ़ी और शिक्षा की खोती विरासत”

“भटकी पीढ़ी और शिक्षा की खोती विरासत” करीब पंद्रह-बीस साल पहले की बात है, जब गाँव की गली में हमारे छोटे दादा जी का आना किसी सन्नाटे से कम नहीं होता था। वह जब भी पैदल चलते, उनके मजबूत कदमों की आहट सुनकर हम बच्चे छिप जाते। उनकी उपस्थिति ही हमें अनुशासन का पाठ पढ़ा…

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“पलास के फूलों की परंपरा”

गाँव की गलियाँ होली के रंग में डूबी रहती थीं, जब चारों तरफ़ से ढोलक की धुन और होली के गीत गूंजते थे। 90 के दशक में होली की एक खास बात थी – यह त्योहार सिर्फ़ हंसी-खुशी का नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य और भाईचारे का प्रतीक भी था। उस समय की होली…

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शहीद चंद्रशेखर: एक वीर योद्धा की अनसुनी कहानी

“कर्तव्य की अंतिम पंक्ति” चंद्रशेखर कुर्रे का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मस्तूरी तहसील के छोटे से गांव जलसो में हुआ था। साधारण परिवार में पले-बढ़े चंद्रशेखर का जीवन हमेशा संघर्षों से भरा रहा। पिता एक किसान थे, जो मेहनत करके परिवार का पेट पालते थे। चंद्रशेखर का बचपन बहुत कठिनाइयों में बीता। आर्थिक…

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साहस की यात्रा: नारी सबला की साहस

शहर में कुमार और प्रतीक्षा अपने छह साल की बेटी के साथ रहते थे। उनका जीवन एक साधारण मध्यम वर्गीय परिवार जैसा था—शांति, मेहनत और सपने से भरा हुआ। दिसंबर का महीना था, और शीतकालीन छुट्टियों के दौरान प्रतीक्षा ने अपने मायके जाने का निश्चय किया। यह यात्रा उसके लिए खास थी क्योंकि वह अपनी…

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“शब्दों की धरोहर: एक लेखक की यात्रा नवभारत से डिजिटल युग तक”

“शब्दों की धरोहर: एक लेखक की यात्रा नवभारत से डिजिटल युग तक” करीब बीस साल पहले की बात है, जब हर सुबह हमारे घर में नवभारत अखबार का आना एक पारिवारिक रिवाज था। अखबार के पन्नों में खबरें तो होतीं, लेकिन मेरे लिए सबसे प्रिय हिस्सा था—शब्दावली वाला पृष्ठ। जैसे ही अखबार मेरे हाथ में…

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“भोलेनाथ का आशीर्वाद: प्रेम और विश्वास की अनंत शक्ति”

छोटे से गांव में एक साधारण और निश्चल व्यक्ति रहता था जिसका नाम रामू था। रामू का जीवन कठिनाइयों से भरा था। बचपन में ही उसने अपने माता-पिता को खो दिया था और उसका पालन-पोषण उसकी बूढ़ी दादी ने किया। वह बचपन से ही सरल, निर्दोष और दूसरों की मदद करने में हमेशा आगे रहता…

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“सायबर कैफ़े”

रायपुर की सड़कों पर बसंत की हल्की धूप थी, जब 2008 में मैं कुकरी पारा के किराए के मकान में रहा करता था। शहर उस समय तकनीक के लिहाज से बस अपनी जगह बना रहा था। न स्मार्टफ़ोन थे, न ही घर-घर इंटरनेट। मनोरंजन के साधन के नाम पर मेरे पास सिर्फ़ एक नोकिया 1600…

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