“क्लिक से रिश्ता, दस्तख़त से जुदाई”

“क्लिक से रिश्ता, दस्तख़त से जुदाई”(एक कहानी, जो हज़ारों के आईने में खुद को देखती है) रुचि कभी ज़्यादा बोलने वाली नहीं थी। लेकिन उसकी चुप्पी में वो सब था, जो शब्द कभी कह नहीं पाते। माँ के मस्तिष्क में उभरते हुए सफ़ेद बाल और पिताजी की झुकी हुई पीठ के बीच, उसने अपने सपनों…

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“गड्ढे से ज्ञान तक”

छत्तीसगढ़ के छोटे से गाँव की मिट्टी में गहराई तक बसे संघर्षों की एक कहानी है, जहाँ जीवन की बुनियाद केवल मेहनत और मजदूरी पर टिकी थी। इस गाँव में जन्मा रामलाल, जो एक साधारण किसान परिवार से था, उसकी जिंदगी का उद्देश्य भी वही था जो उसके पिता और दादा का था—खेती और मजदूरी।…

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परिवर्तन की राह

शहर से सटे एक गाँव में जमींदार बनवारी का परिवार रहता था। उनके पूर्वजों से विरासत में मिली ज़मीनें कभी परिवार की शान और रुतबे का प्रतीक थीं। बनवारी ने अपने जीवन में कभी कोई कमी महसूस नहीं की, क्योंकि ज़मीन की उपज और मवेशियों से परिवार का गुजारा आराम से चलता था। लेकिन बनवारी…

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“भटकी पीढ़ी और शिक्षा की खोती विरासत”

“भटकी पीढ़ी और शिक्षा की खोती विरासत” करीब पंद्रह-बीस साल पहले की बात है, जब गाँव की गली में हमारे छोटे दादा जी का आना किसी सन्नाटे से कम नहीं होता था। वह जब भी पैदल चलते, उनके मजबूत कदमों की आहट सुनकर हम बच्चे छिप जाते। उनकी उपस्थिति ही हमें अनुशासन का पाठ पढ़ा…

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“पलास के फूलों की परंपरा”

गाँव की गलियाँ होली के रंग में डूबी रहती थीं, जब चारों तरफ़ से ढोलक की धुन और होली के गीत गूंजते थे। 90 के दशक में होली की एक खास बात थी – यह त्योहार सिर्फ़ हंसी-खुशी का नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ सामंजस्य और भाईचारे का प्रतीक भी था। उस समय की होली…

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“भोलेनाथ का आशीर्वाद: प्रेम और विश्वास की अनंत शक्ति”

छोटे से गांव में एक साधारण और निश्चल व्यक्ति रहता था जिसका नाम रामू था। रामू का जीवन कठिनाइयों से भरा था। बचपन में ही उसने अपने माता-पिता को खो दिया था और उसका पालन-पोषण उसकी बूढ़ी दादी ने किया। वह बचपन से ही सरल, निर्दोष और दूसरों की मदद करने में हमेशा आगे रहता…

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“गाँव की नई सुबह,पंचायती राज से सशक्त होता छत्तीसगढ़”

छत्तीसगढ़ के छोटे से गाँव रसौटा में चुनावी माहौल गर्म था। गाँव की गलियों में रोज़ चर्चाएँ होतीं, जनसभाएँ होतीं, और प्रत्याशी अपने-अपने समर्थकों के साथ घर-घर जाकर समर्थन मांग रहे थे। हर किसी के चेहरे पर उम्मीद और उत्साह झलक रहा था। पंचायत चुनाव नज़दीक थे, और गाँव के लोग बड़ी दिलचस्पी के साथ…

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खंडहर होती यादें

विगत दिनों पिता जी का 86 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया। आज गाँव में उनकी तेरहवीं पूरी विधि-विधान से सम्पन्न की गई। पिता जी की आखिरी साँसें शहर के हमारे घर पर निकलीं, लेकिन उनका मन हमेशा गाँव में ही बसा था। उम्र के आखिरी पड़ाव पर, मजबूरी में हमें उन्हें शहर लाना…

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“शांति निवास: एकता की विरासत”

सर्दियों की ठिठुरती शाम थी। गाँव के एक कोने में एक पुराना सा, मिट्टी की दीवारों और खपरैल की छत वाला बड़ा घर था। इस घर में वर्षों से एक संयुक्त परिवार निवास करता था। चार पीढ़ियों का एक साथ होना उस घर की खासियत थी। बड़े-बुज़ुर्गों से लेकर छोटे बच्चों तक, सब एक ही…

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साधराम की यादों का कोठार

छत्तीसगढ़ के जांजगीर जिले के पामगढ़ तहसील के गाँव हिर्री की मिट्टी में एक पुराना और साधारण परिवार बसा हुआ था, जो पिछले कई पीढ़ियों से इस गाँव में निवासरत हैं। इस परिवार की कहानी साधराम से शुरू होती है, जो 70 वर्ष का किसान था। उसका जीवन सादगी और अनुभव का अनूठा उदाहरण था।…

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