प्रेम की अधूरी पराकाष्ठा

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना “प्रेम की अधूरी पराकाष्ठा”:“वह प्रेम जो अपनी गहराई, पवित्रता और निस्वार्थता में सर्वोच्च था — पर फिर भी अधूरा रह गया।” साल 2014 की जुलाई थी। मौसम बरसात का था और मन भीगने को तैयार। यूनिवर्सिटी का तीसरा साल चल रहा था। लाइब्रेरी की खिड़की के पास बैठा मैं,…

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शब्दों का संस्कार: जब भाषा से मर्यादा हटने लगे

लेखक: एम बी बलवंत सिंह खन्ना भारत, एक ऐसा देश जो अपनी सभ्यता, संस्कृति और संस्कारों के लिए विश्वविख्यात रहा है। यहाँ की मिट्टी से लेकर यहाँ की बोली तक में एक खास तरह की आत्मीयता, विनम्रता और मर्यादा झलकती थी। हम बचपन से सुनते आए हैं — वाणी में मधुरता होनी चाहिए, क्योंकि शब्दों…

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ग़रीब का आशियाना: विकास बनाम विस्थापन की दास्तान

जब मानव ने पृथ्वी पर जीवन शुरू किया, उसकी बुनियादी ज़रूरतें थीं—भोजन, वस्त्र और आश्रय। पाषाण युग में गुफाएं उसकी छत थीं, पत्ते और जानवरों की खालें वस्त्र। फिर समय के साथ मानव ने खेती, निर्माण और बुनाई सीखी, समाज बना, नगर बसे, शासन और कानून विकसित हुए। शिक्षा, चिकित्सा, और कारोबार जैसे क्षेत्र आगे…

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उदन्त मार्तंड: उस पहले दीपक की कहानी जिसने हिंदी पत्रकारिता की राह रोशन की

लेखक- दिव्यांशु कश्यप जब हम आज सुबह की चाय के साथ अख़बार खोलते हैं या सोशल मीडिया पर हिंदी में कोई खबर पढ़ते हैं, तो शायद ही सोचते हैं कि इस अभिव्यक्ति की आज़ादी की शुरुआत कब और कैसे हुई होगी। पर कभी-कभी इतिहास की धूल में छुपे उन पहले क़दमों को याद करना ज़रूरी…

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“शहर के सीने में सपने”

सूरज की पहली किरणें जैसे ही पहाड़ियों से उतरकर धरती को छूने लगीं, गाँव की पगडंडियों पर हल्की धूल उड़ने लगी। सुदर्शन, बाईस साल का एक युवक, पास की पहाड़ी पर बैठा दूर तक फैले खेतों और झोपड़ियों को निहार रहा था। यह वही गाँव था जहाँ उसकी जड़ें थीं, पर आज उसका मन कुछ…

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“क्लिक से रिश्ता, दस्तख़त से जुदाई”

“क्लिक से रिश्ता, दस्तख़त से जुदाई”(एक कहानी, जो हज़ारों के आईने में खुद को देखती है) रुचि कभी ज़्यादा बोलने वाली नहीं थी। लेकिन उसकी चुप्पी में वो सब था, जो शब्द कभी कह नहीं पाते। माँ के मस्तिष्क में उभरते हुए सफ़ेद बाल और पिताजी की झुकी हुई पीठ के बीच, उसने अपने सपनों…

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