“क्लिक से रिश्ता, दस्तख़त से जुदाई”
(एक कहानी, जो हज़ारों के आईने में खुद को देखती है) रुचि कभी ज़्यादा बोलने वाली नहीं थी। लेकिन उसकी चुप्पी में वो सब था, जो शब्द कभी कह नहीं पाते। माँ के मस्तिष्क में उभरते हुए सफ़ेद बाल और पिताजी की झुकी हुई पीठ के बीच, उसने अपने सपनों को तह करके अलमारी के…
