“ईमानदारी की पाठशाला”

वर्ष 2005 का समय था। जांजगीर जिले में शिक्षा का माहौल कुछ और ही था, एक ऐसा माहौल जिसे अब सोचकर भी अजीब लगता है। नकल का इतना जोर था कि परीक्षा देने वाला हर विद्यार्थी असमंजस में होता कि वह मेहनत करे या नकल के भरोसे बैठे। परीक्षा केंद्रों पर नकल करवाने वालों की…

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“भटकी पीढ़ी और शिक्षा की खोती विरासत”

“भटकी पीढ़ी और शिक्षा की खोती विरासत” करीब पंद्रह-बीस साल पहले की बात है, जब गाँव की गली में हमारे छोटे दादा जी का आना किसी सन्नाटे से कम नहीं होता था। वह जब भी पैदल चलते, उनके मजबूत कदमों की आहट सुनकर हम बच्चे छिप जाते। उनकी उपस्थिति ही हमें अनुशासन का पाठ पढ़ा…

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साहस की यात्रा: नारी सबला की साहस

शहर में कुमार और प्रतीक्षा अपने छह साल की बेटी के साथ रहते थे। उनका जीवन एक साधारण मध्यम वर्गीय परिवार जैसा था—शांति, मेहनत और सपने से भरा हुआ। दिसंबर का महीना था, और शीतकालीन छुट्टियों के दौरान प्रतीक्षा ने अपने मायके जाने का निश्चय किया। यह यात्रा उसके लिए खास थी क्योंकि वह अपनी…

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“शब्दों की धरोहर: एक लेखक की यात्रा नवभारत से डिजिटल युग तक”

“शब्दों की धरोहर: एक लेखक की यात्रा नवभारत से डिजिटल युग तक” करीब बीस साल पहले की बात है, जब हर सुबह हमारे घर में नवभारत अखबार का आना एक पारिवारिक रिवाज था। अखबार के पन्नों में खबरें तो होतीं, लेकिन मेरे लिए सबसे प्रिय हिस्सा था—शब्दावली वाला पृष्ठ। जैसे ही अखबार मेरे हाथ में…

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“सायबर कैफ़े”

रायपुर की सड़कों पर बसंत की हल्की धूप थी, जब 2008 में मैं कुकरी पारा के किराए के मकान में रहा करता था। शहर उस समय तकनीक के लिहाज से बस अपनी जगह बना रहा था। न स्मार्टफ़ोन थे, न ही घर-घर इंटरनेट। मनोरंजन के साधन के नाम पर मेरे पास सिर्फ़ एक नोकिया 1600…

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“गाँव की नई सुबह,पंचायती राज से सशक्त होता छत्तीसगढ़”

छत्तीसगढ़ के छोटे से गाँव रसौटा में चुनावी माहौल गर्म था। गाँव की गलियों में रोज़ चर्चाएँ होतीं, जनसभाएँ होतीं, और प्रत्याशी अपने-अपने समर्थकों के साथ घर-घर जाकर समर्थन मांग रहे थे। हर किसी के चेहरे पर उम्मीद और उत्साह झलक रहा था। पंचायत चुनाव नज़दीक थे, और गाँव के लोग बड़ी दिलचस्पी के साथ…

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खंडहर होती यादें

विगत दिनों पिता जी का 86 वर्ष की आयु में स्वर्गवास हो गया। आज गाँव में उनकी तेरहवीं पूरी विधि-विधान से सम्पन्न की गई। पिता जी की आखिरी साँसें शहर के हमारे घर पर निकलीं, लेकिन उनका मन हमेशा गाँव में ही बसा था। उम्र के आखिरी पड़ाव पर, मजबूरी में हमें उन्हें शहर लाना…

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“आवश्यकता है-“सपनों की राह”

आकाश, एक साधारण सा युवक था, जो गाँव की मिट्टी से बेतरह जुड़ा हुआ था। उसके सपने बड़े थे, और उन्हें पूरा करने का दृढ़ निश्चय भी। गाँव के स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद, उसने अपने पिता की सलाह पर कस्बे के कॉलेज में दाखिला लिया। कॉलेज की पढ़ाई खत्म होते ही, आकाश…

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वर्तमान हाइब्रिड युग

आयुर्वेद, कृषि, लेखन शैली और डिजिटल परिवर्तन हम जिस युग में जी रहे हैं, उसे हम “हाइब्रिड युग” के रूप में देख सकते हैं। यह युग उन परिवर्तनों का समय है जब परंपरागत तरीके और आधुनिक तकनीकी विधियाँ एक साथ कार्य कर रही हैं, और इसका प्रभाव हमारे जीवन के हर क्षेत्र में देखने को…

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